जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज (म्यूटेशन) करवाना अनिवार्य है। जानें — आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और समय सीमा।
दाखिल खारिज क्या होता है?
दाखिल खारिज (Dakhil Kharij) या नामांतरण वह प्रक्रिया है जिसमें जमीन का नया मालिक खतौनी में अपना नाम दर्ज करवाता है। रजिस्ट्री के बाद अगर म्यूटेशन न हो तो खतौनी में पुराने मालिक का नाम ही रहता है।
⚠ रजिस्ट्री के 3 महीने के अंदर दाखिल खारिज का आवेदन करना जरूरी है। देरी से अतिरिक्त शुल्क और कानूनी पेचीदगियां हो सकती हैं।
दाखिल खारिज के लिए आवश्यक दस्तावेज
- रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रति (Sale Deed)
- नई खतौनी की नकल
- पुरानी खतौनी / खसरा
- क्रेता और विक्रेता के आधार कार्ड
- पासपोर्ट साइज फोटो (दोनों पक्ष)
- रजिस्ट्री की मूल रसीद
- भूनक्शा की प्रति (यदि उपलब्ध)
दाखिल खारिज की ऑनलाइन प्रक्रिया
- upbhulekh.gov.in → "दाखिल खारिज / विरासत" पर जाएं
- जनपद, तहसील, और ग्राम चुनें
- नए खातेदार का नाम और विवरण भरें
- रजिस्ट्री विवरण (तारीख, क्रमांक) दर्ज करें
- सभी दस्तावेज अपलोड करें
- आवेदन संख्या नोट करें
दाखिल खारिज की स्थिति कैसे जांचें?
upbhulekh.gov.in पर "दाखिल खारिज की स्थिति" विकल्प से आवेदन क्रमांक डालकर स्थिति देखें। अनुमोदन के बाद खतौनी में नया नाम दर्ज हो जाता है।
💡 सामान्यतः दाखिल खारिज 30-45 कार्य दिवसों में पूर्ण होता है। यदि आपत्ति (Objection) लगती है तो अतिरिक्त समय लग सकता है।
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