वरासत (उत्तराधिकार) कैसे दर्ज कराएं?
जमीन मालिक की मृत्यु के बाद उसकी जमीन कानूनी वारिसों के नाम रिकॉर्ड में दर्ज कराना जरूरी है। नीचे पूरी प्रक्रिया दी गई है।
वरासत दर्ज कराने के 5 कदम
मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करें
नगर निगम/पंचायत से मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र लें; यह वरासत का आधार है।
तहसील में वरासत आवेदन दें
लेखपाल/तहसील में उत्तराधिकार आवेदन दें, साथ में परिवार रजिस्टर की नकल, वारिसों के पहचान पत्र और मृतक के नाम की खतौनी।
लेखपाल जांच व आपत्ति अवधि
लेखपाल मौके पर जांच करता है और सार्वजनिक सूचना जारी होती है ताकि कोई आपत्ति हो तो दर्ज हो।
तहसीलदार का वरासत आदेश
आपत्ति न होने पर तहसीलदार उत्तराधिकार का आदेश देता है और वारिसों के नाम दर्ज करने को कहा जाता है।
नई खतौनी सत्यापित करें
bhulekh.up.gov.in पर जांचें कि खतौनी में वारिसों के नाम दर्ज हो गए हैं।
सामान्य प्रश्न
Q.वरासत क्या होती है?
मालिक की मृत्यु के बाद उसकी जमीन कानूनी वारिसों के नाम रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया।
Q.वरासत और वसीयत (will) में क्या अंतर है?
वसीयत मालिक जीवित रहते बनाता है (किसे क्या मिलेगा); वरासत मृत्यु के बाद कानूनी वारिसों के आधार पर होती है (वसीयत न हो तो)।
Q.वरासत में कितना समय लगता है?
आमतौर पर कुछ हफ्ते से कुछ महीने (आपत्ति अवधि व सत्यापन पर निर्भर)।
Q.क्या वरासत ऑनलाइन होती है?
आवेदन कई जगह RCCMS/तहसील स्तर पर होता है; प्रक्रिया व स्थिति के लिए अपने तहसील/लेखपाल से पुष्टि करें।
यह गाइड सूचनात्मक है। प्रक्रिया व शुल्क तहसील अनुसार बदल सकते हैं — आधिकारिक जानकारी संबंधित कार्यालय/पोर्टल से लें।